जब वज़्न बढ़ गया तो बिखरना है लाज़मी इन काले बादलों का बरसना है लाज़मी
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया
Mehshar Afridi
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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तेरे जाने से दुनिया भी जुदा है मुझे कितना सताया जा रहा है
NEERAJ SAINI
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पलों का बीतना दस्तूर है ये कम भी होते हैं ख़ुशी में खिल रहे चेहरे के पीछे ग़म भी होते हैं
NEERAJ SAINI
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नुक़सान बहुत है मैं बिखर क्यूँ नहीं जाता ये प्यार नशा है तो उतर क्यूँ नहीं जाता
NEERAJ SAINI
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ज़ुल्म जो करते हैं ये ज़ेहन में रख लें अपने वक़्त ये अपने को हर-हाल में दोहराता है
NEERAJ SAINI
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हश्र तक पुरा न होगा दोस्तों नुक़सान ये शे'र मत समझो इसे तुम है मेरा ईमान ये
NEERAJ SAINI
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