जैसे खिल जाती थी तू बारिश में वैसी मेरी उदासी है बरसात
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मैं भटकते हुए मिला तुम सेे तुम मेरा आख़िरी सहारा हो
Vicky Kumar Rajak
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तू तो सच में ही झूठा निकला यारा तू तो कहता था हम मिलते रहेंगे
Vicky Kumar Rajak
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रात भर जो मेरा साया बना था दिन में मुझ को वो किधर छोड़ गया
Vicky Kumar Rajak
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दिन कैसे कैसे आए जीवन में मेरे ग़म मेरे सारे उस ने सरगम में लिखे
Vicky Kumar Rajak
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तेरे कहने से सब ख़तम कैसे मेरी उम्मीद अब भी बाकी है
Vicky Kumar Rajak
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