झुके तो जन्नत उठे तो ख़ंजर करेंगी हम को तबाह आँखें
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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इतने गहरे उतर गया हूँ दरिया-ए-दर्द-ए-दिल में हाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ कट्टे ख़ंजर रस्सी माचिस कुछ दिन मुझ सेे दूर रखो कुछ करने से चूक गया हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ
Vashu Pandey
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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
Nikunj Rana
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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा
Waseem Barelvi
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अभी तो शाम की दस्तक हुई है अभी से लग गया बिस्तर हमारा यही तन्हाई है जन्नत हमारी इसी जन्नत में है अब घर हमारा
Vikas Sharma Raaz
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जो सारे ज़ख़्म मेरे भर दिया करता उसी के नाम का ख़ंजर बनाया है
Parul Singh "Noor"
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हुआ टुकड़े वहम जब ये कहा उस ने तुम्हीं सब कुछ हो लेकिन मेरा इश्क़ नहीं
Parul Singh "Noor"
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आसमाँ से गरज छेड़ती है हमें एक बारिश में भी भीगे थे साथ हम
Parul Singh "Noor"
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सभी रिश्तें मैं यूँँ बचाए हूँ जैसे तड़पते दियों को हवा देते रहना
Parul Singh "Noor"
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मिरा नज़दीक से छू कर गुज़र जाना पलट कर उस का मुझ को कहना महबूबा
Parul Singh "Noor"
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