इतने गहरे उतर गया हूँ दरिया-ए-दर्द-ए-दिल में हाथ पकड़ कर खींच ले वरना डूब के भी मर सकता हूँ कट्टे ख़ंजर रस्सी माचिस कुछ दिन मुझ सेे दूर रखो कुछ करने से चूक गया हूँ मैं कुछ भी कर सकता हूँ
Related Sher
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
135 likes
किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
109 likes
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
263 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
More from Vashu Pandey
इतने कहाँ नसीब कि इस सेे प्यास बुझाएँ खेल करें दरिया हम जैसों को अपने पास बिठा ले काफ़ी है
Vashu Pandey
34 likes
इश्क़ क़ैस फ़रहाद रोमियो जैसे ही कर सकते हैं हम तो ठहरे दस से छह तक ऑफ़िस जाने वाले लोग
Vashu Pandey
31 likes
बाक़ी सारे काम भुलाकर इश्क़ किया सुब्ह से ले कर शाम बराबर इश्क़ किया ग़लती ये थोड़े थी इश्क़ किया हम ने ग़लती ये थी ग़ैर बिरादर इश्क़ किया
Vashu Pandey
29 likes
इस लिए भी इस शजर से सब को इतना प्यार है दे रहा है फल अभी ये और सायादार है ऐ ख़ुदा इस ना-ख़ुदा की ख़ैर हो ये नासमझ ये समझता है कि इस के हाथ में पतवार है
Vashu Pandey
35 likes
ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है
Vashu Pandey
30 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Vashu Pandey.
Similar Moods
More moods that pair well with Vashu Pandey's sher.







