सभी रिश्तें मैं यूँँ बचाए हूँ जैसे तड़पते दियों को हवा देते रहना
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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रोज़ ढक लेती थी नीला जिस्म अपना शुक्र है आ गई बाहर घर की बातें
Parul Singh "Noor"
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जो सारे ज़ख़्म मेरे भर दिया करता उसी के नाम का ख़ंजर बनाया है
Parul Singh "Noor"
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हुआ टुकड़े वहम जब ये कहा उस ने तुम्हीं सब कुछ हो लेकिन मेरा इश्क़ नहीं
Parul Singh "Noor"
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जि यूँँगी किस तरह तेरे बिना मत फिक्र कर इस की गुज़रती जिस शहर से हूँ दिवाने छोड़ आती हूँ
Parul Singh "Noor"
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आख़िर में यूँँ हुआ कि मिरी मात हो गई मैं उस के साथ थी जो ज़माने के साथ था
Parul Singh "Noor"
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