जिन के जलने से दमकती हो ये दुनिया 'शादाब' उन चराग़ों से कभी तुम भी तो सट कर देखो
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
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ये तुम सब मिल के जो कुछ कह रहे हो मैं कह सकता हूँ पर कहना नहीं है हमारा शे'र भी सुनने न आएँ हमारा दुख जिन्हें सहना नहीं है
Ali Zaryoun
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
Jigar Moradabadi
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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Mirza Ghalib
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वो रो रहा है उसे चुप करा दो मत रोए कि इस जहाँ के लिए रो रहा यही दुनिया
Shadab bastavi
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वो मुझ सेे रोज़ कहती थी मुझे तुम चाँद ला कर दो उसे इक आइना देकर अकेला छोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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ख़ुदा के बंदे कि शैतान के पुजारी हैं इबादतों में भी उन के है बस बसी दुनिया
Shadab bastavi
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जो मर रहे हैं उन्हें क्यूँ हसीं लगी दुनिया सो इस लिए मुझे लगती है बे-हिसी दुनिया
Shadab bastavi
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उदासी रो के ये बोली मैं हूँ दरकार-ए-शादाबी मैं तेरी आशियाँ की सम्त उस को मोड़ आया हूँ
Shadab bastavi
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