जिस के हाथों में रेखाएँ हो क़िस्मत की वो क़िस्मत का मारा कैसे हो सकता है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़हर पीने से क्या होता है ‘अभी’ मर तो लोग इश्क़ में भी जाते हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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वो राह-ए-इश्क़ में मुझ सेे कहीं बिछड़ा तो था पर अब भी साथ चलता है मेरे साया बनकर
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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वो कहीं और है नहीं मिलता और हम अपने घर नहीं जाते
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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वो कहीं और है नहीं मिलता और हम अपने घर नहीं जाते
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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क़यामत का ही तो गवाह हूँ मैं मोहब्बत में ही तो तबाह हूँ मैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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