जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया हुईं जिस पे तेरी नवाज़िशें वो बहार बन के सँवर गया
Related Sher
ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
122 likes
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
263 likes
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
107 likes
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
More from Fana Bulandshahri
किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं ऐसा मिला है दर्द-ए-दिल जिस की कोई दवा नहीं अपना बना के ऐ सनम तुम ने जो आँख फेर ली ऐसा बुझा चराग़-ए-दिल फिर ये कभी जला नहीं
Fana Bulandshahri
8 likes
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया
Fana Bulandshahri
39 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Fana Bulandshahri.
Similar Moods
More moods that pair well with Fana Bulandshahri's sher.







