कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है
Waseem Barelvi
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अच्छा ख़्वाब दिखाया तुम ने ख़्वाब दिखाने वालों में ऐसी बात कहाँ होती थी इस सेे पहले वालों में दरवाज़े पर ताला हो तो फिर भी दस्तक दे देना नाम तो शामिल हो जाएगा दस्तक देने वालों में
Aman Shahzadi
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अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
Nida Fazli
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पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया
Fazil Jamili
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा
Nida Fazli
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दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही
Nida Fazli
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घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह
Nida Fazli
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ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र आख़िरी साँस तक बे-क़रार आदमी
Nida Fazli
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एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा
Nida Fazli
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