कहाँ है तू कि तिरे इंतिज़ार में ऐ दोस्त तमाम रात सुलगते हैं दिल के वीराने
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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कौन अच्छा है इस ज़माने में क्यूँँ किसी को बुरा कहे कोई
Nasir Kazmi
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आए
Nasir Kazmi
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बस यूँँ ही दिल को तवक़्क़ो' सी है तुझ से वर्ना जानता हूँ कि मुक़द्दर है मेरा तन्हाई
Nasir Kazmi
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जिन्हें हम देख कर जीते थे 'नासिर' वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं
Nasir Kazmi
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