क़लम हाथों में लकड़ी का कलर तन पे सियाही के न जाने खो गए जा कर कहाँ दिन बादशाही के
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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देर तक मैं तुझे सीने से लगाए रक्खूँ कोई इस वक़्त की रफ़्तार को धीमा कर दे
YAWAR ALI
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क्या ये भी किसी जंग के ऐलान से कम है हम सह के तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम घूम रहे हैं
YAWAR ALI
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अब वो ही दिवानों सा मुझे ढूँढ़ रहा है हँसता था कभी जो मुझे दीवाना समझ कर
YAWAR ALI
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ये तो इक रस्म-ए-नुमाइश है अदा करता हूँ कौन कमबख़्त है ख़ुश अहद-ए-जुदाई कर के
YAWAR ALI
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तुझे मैं भूल तो जाऊँ मगर ये भी बता कैसे हर इक एहसास ज़िंदा है हर इक अरमान बाक़ी है
YAWAR ALI
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