ये तो इक रस्म-ए-नुमाइश है अदा करता हूँ कौन कमबख़्त है ख़ुश अहद-ए-जुदाई कर के
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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क्या ये भी किसी जंग के ऐलान से कम है हम सह के तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम घूम रहे हैं
YAWAR ALI
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अब वो ही दिवानों सा मुझे ढूँढ़ रहा है हँसता था कभी जो मुझे दीवाना समझ कर
YAWAR ALI
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तुझे मैं भूल तो जाऊँ मगर ये भी बता कैसे हर इक एहसास ज़िंदा है हर इक अरमान बाक़ी है
YAWAR ALI
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झेलने होंगे तुम को ये मौसम सभी ज़िंदगी बस नहीं फ़रवरी की तरह
YAWAR ALI
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बड़ी मग़रूर आदत है ग़मों में मुस्कुराने की मेरी नस नस में बहती ये अदाकारी नहीं जाती
YAWAR ALI
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