क्या ये भी किसी जंग के ऐलान से कम है हम सह के तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम घूम रहे हैं
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुझे मैं भूल तो जाऊँ मगर ये भी बता कैसे हर इक एहसास ज़िंदा है हर इक अरमान बाक़ी है
YAWAR ALI
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क़लम हाथों में लकड़ी का कलर तन पे सियाही के न जाने खो गए जा कर कहाँ दिन बादशाही के
YAWAR ALI
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वो मिला भी तो रुख़्सती कहने कैसी ऐ दिल ये शादमानी है
YAWAR ALI
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ये तो इक रस्म-ए-नुमाइश है अदा करता हूँ कौन कमबख़्त है ख़ुश अहद-ए-जुदाई कर के
YAWAR ALI
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अब वो ही दिवानों सा मुझे ढूँढ़ रहा है हँसता था कभी जो मुझे दीवाना समझ कर
YAWAR ALI
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