करे लोग ज़ख़्मी भले ही ज़बाँ से मगर तू ज़बाँ पर दवा सा असर रख
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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ज़िक्र अब भी मेरा किया होगा नाम इक मरतबा लिया होगा ग़म उसे ना सहें गए हो जब जाम पे जाम फिर पिया होगा
Kohar
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ज़ख़्म अपनों से मिले है ग़ैर पूछे हाल मेरा
Kohar
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कब आएँगे हमारे अच्छे दिन? ऐसे होते तुम्हारे अच्छे दिन?
Kohar
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ख़ुद को बेहतर करते करते मुझ सेे बेहतर को खो बैठा
Kohar
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साथ में कुछ जिए हम जो लम्हें याद कर अब उन्हें मर रहा हूँ
Kohar
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