कौन देगा सुकून आँखों को किस को देखें कि नींद आ जाए
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दर्द के टुकड़े हैँ अश'आर नहीं अज़रा हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख़्मों को पिरोते हैँ
Binte Reshma
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राब्ते ख़त्म कर लिए सब सेे अब मुझे अपने साथ रहना है
Binte Reshma
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आँखों को अब समझाना होगा ख़्वाबों की तकमील नहीं होती
Binte Reshma
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तुझ को पाकर भी कुछ नहीं पाया तेरे हो के भी बे-सहारे हैं
Binte Reshma
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हार जाने पे लोग कहते हैं कौन झगड़ा करे मुक़द्दर से
Binte Reshma
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