ख़ास, जिगरी, मान ले मतलूब से हिज्र 'कश' तुझे मंज़ूर है? महबूब से हिज्र
Related Sher
घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
294 likes
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
228 likes
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
296 likes
भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
272 likes
More from Aashish kargeti 'Kash'
याद में रख लिया तवाईफ़ को रात में फिर से सो गया जल्दी
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
के सब है सुनाया पुराना ये इक शे'र मेरा नया है
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
उस पे इतना यक़ीं किया मैं ने आसमाँ को ज़मीं किया मैं ने
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
मुझे भी बताओ कि क्या है अभी भी अगर कुछ बचा है
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
हथेली बंद कर के दूर तक पैदल चलो ना यार अपना घर दिखाता हूँ
Aashish kargeti 'Kash'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aashish kargeti 'Kash'.
Similar Moods
More moods that pair well with Aashish kargeti 'Kash''s sher.







