ख़ामुशी सुनने की आदत डालो मेरे लब कुछ नहीं कहने वाले
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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तीर मेरी रूह में जा कर धँसा था और वो मरहम जिस्म तक ही करता था काम
sahllucknowi
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धड़कन मेरी थोड़ी मद्धम सी चलती है इक शो'ला पलता है ख़ामोशी पलती है
sahllucknowi
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दयार-ए-दिल में बस्ती सबकी बसती हैं सॅंवरती भी है और फिर सब झुलसती हैं
sahllucknowi
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पास मुझे बैठने नहीं देती अब उस की पसंद की जो साड़ी नहीं ली
sahllucknowi
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ज़िंदगी बस साँस लेना ही नहीं है ये समझ लो थपथपा दें पीठ जो पापा तो क्या ही बात होगी
sahllucknowi
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