ख़ामुशी बिखरी हुई है कहकहों की आड़ में दिल को सब समझा रहे हैं ठीक है सब ठीक है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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ये जो हर सम्त ही वीराना नज़र आता है सच कहूँ गर तो ये ग़लती है तेरी आँखों की
Aqib khan
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तुम को जाना है चले जाओ मगर याद रहे हम तो वो हैं जो पलटकर भी न देखेंगे कभी
Aqib khan
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मिलेंगे कहाँ पे ये ग़म सीने वाले बता दे मुझे हर घड़ी जीने वाले
Aqib khan
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मुस्कुरा कर जान ले लेना हुनर है इस हुनर के आप फिर उस्ताद ठहरे
Aqib khan
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सुख़न की दुनिया में आक़िब नए नहीं हो तुम तुम्हारे जैसे यहाँ कितने ख़ाक छानते हैं
Aqib khan
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