ये जो हर सम्त ही वीराना नज़र आता है सच कहूँ गर तो ये ग़लती है तेरी आँखों की
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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बचपना ऐ लड़को तुम सेे कभी छूटता ही नहीं जवान होना तो बस लड़कियों को आता है
Kumar Vishwas
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है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
Ismail Raaz
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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सुख़न की दुनिया में आक़िब नए नहीं हो तुम तुम्हारे जैसे यहाँ कितने ख़ाक छानते हैं
Aqib khan
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वो तो निगाहों ने मार डाला वगरना हम पे चली है किस की
Aqib khan
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मिलेंगे कहाँ पे ये ग़म सीने वाले बता दे मुझे हर घड़ी जीने वाले
Aqib khan
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तुम को जाना है चले जाओ मगर याद रहे हम तो वो हैं जो पलटकर भी न देखेंगे कभी
Aqib khan
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ओढ़ कर मसरूफि़यत आ तो गए हैं देखना है ज़िन्दगी रोकेगी कब तक
Aqib khan
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