ख़ास ख़ुशबू शर हवा में आ रही है फूल कोई फिर दुआ से खिल गया है
Related Sher
मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
140 likes
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
136 likes
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
144 likes
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
135 likes
More from Abhay Mishra
देरी से समझोगे इनका साथ मगर तुम क्या जानो ऐसे लोगों का होना जो ख़ूब अकेले रहते हैं
Abhay Mishra
0 likes
बहुत डूबे चलो अब तो किनारा कर लिया जाए हमारा था उसे मेरा तुम्हारा कर लिया जाए अँधेरा है बहुत चारों तरफ़ कुछ ऐसा करते हैं जलाकर दरमियाँ का सब उजाला कर दिया जाए
Abhay Mishra
1 likes
हम भी उसी अंजाम पे आ कर हुए ख़ुद से फ़ना जिस मोड़ के आगे समुंदर के सिवा कुछ भी नहीं
Abhay Mishra
1 likes
वो कली अब ख़ुद निखरती जा रही है धूप आने तक जो कुछ सुकड़ी हुई थी
Abhay Mishra
2 likes
उसे देखा मगर बोला नहीं मैं कई दिन से यही सब चल रहा है
Abhay Mishra
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Abhay Mishra.
Similar Moods
More moods that pair well with Abhay Mishra's sher.







