वो कली अब ख़ुद निखरती जा रही है धूप आने तक जो कुछ सुकड़ी हुई थी
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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जो तेरी बाँहों में हँसती रही है खेली है वो लड़की राज़ नहीं है कोई पहेली है हाँ मेरा हाथ पकड़ कर झटक दिया उस ने सहारा दे के बताया कि तू अकेली है
Tajdeed Qaiser
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बहुत डूबे चलो अब तो किनारा कर लिया जाए हमारा था उसे मेरा तुम्हारा कर लिया जाए अँधेरा है बहुत चारों तरफ़ कुछ ऐसा करते हैं जलाकर दरमियाँ का सब उजाला कर दिया जाए
Abhay Mishra
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हम भी उसी अंजाम पे आ कर हुए ख़ुद से फ़ना जिस मोड़ के आगे समुंदर के सिवा कुछ भी नहीं
Abhay Mishra
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अब क़दर करना मुझे भी सीखना है ख़ूब-सूरत हो मगर बीमार भी हो
Abhay Mishra
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देरी से समझोगे इनका साथ मगर तुम क्या जानो ऐसे लोगों का होना जो ख़ूब अकेले रहते हैं
Abhay Mishra
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साँस मुझ को अब तलक़ आई नहीं है तू गले लग कर मुझे साँसें अता कर
Abhay Mishra
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