ख़ताएँ दोनों की यकसाँ थी पर त'अज्जुब है किसी को दाद मिली और किसी को रुसवाई
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
Anand Raj Singh
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तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत और हर मौज से लड़ना भी तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए
Zehra Nigaah
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हर फ़िक्र की अपनी मंज़िल थी हर सोच का अपना रस्ता था
Zehra Nigaah
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छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं
Zehra Nigaah
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