हर फ़िक्र की अपनी मंज़िल थी हर सोच का अपना रस्ता था
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बस एक ही दोस्त है दुनिया में अपना मगर उस से भी झगड़ा चल रहा है
Zubair Ali Tabish
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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सारे का सारा तो मेरा भी नहीं और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं ग़ौर से देखने पे बोली है शादी से पहले सोचना भी नहीं
Kushal Dauneria
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत और हर मौज से लड़ना भी तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए
Zehra Nigaah
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ख़ताएँ दोनों की यकसाँ थी पर त'अज्जुब है किसी को दाद मिली और किसी को रुसवाई
Zehra Nigaah
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अब भी कुछ लोग सुनाते हैं सुनाए हुए शे'र बातें अब भी तिरी ज़ेहनों में बसी लगती हैं
Zehra Nigaah
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एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की
Zehra Nigaah
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