बस एक ही दोस्त है दुनिया में अपना मगर उस से भी झगड़ा चल रहा है
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अब तलक उस को ध्यान हो मेरा क्या पता ये गुमान हो मेरा
Zubair Ali Tabish
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चूड़ियाँ बेच के वो मेरे लिए लाई 'गिटार' तार छेड़ूँ तो खनकने की सदा आती है
Zubair Ali Tabish
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जहाँ तक आके तुम वापस गए हो वहाँ अब तक कोई पहुँचा नहीं है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारा सिर्फ़ हवाओं पे शक गया होगा चराग़ ख़ुद भी तो जल जल के थक गया होगा
Zubair Ali Tabish
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शायद क़ज़ा ने मुझ को ख़ज़ाना बना दिया ऐसा नहीं तो क्यूँँ मुझे दफ़ना रहे हैं लोग
Zubair Ali Tabish
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