ख़ुदा क़िस्मत में जो लिख दे वही मिलता है इंसाँ को मुहब्बत तो किसी को भी किसी का कर नहीं सकती
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुझ से दूर हुआ तो ये मालूम हुआ ख़ुद से कितना दूर निकल आया था मैं
Avtar Singh Jasser
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ज़रा नज़दीक आ कर सुन मेरी इक बात ऐ उर्दू मेरी तहरीर बिन तेरे मुक़म्मल हो नहीं सकती
Avtar Singh Jasser
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तेरी आँखों ने दीवाना कर रखा है मंदिर जैसा दिल मयख़ाना कर रखा है
Avtar Singh Jasser
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जनाब आधा अधूरा सा वही क़िस्सा हूँ मैं तो कई किरदार भी जिस को मुकम्मल कर न पाए
Avtar Singh Jasser
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बिन पिए बे-ख़ुद ख़ुदी को कर के देखा है बाज़ुओं में हमनशीं को भर के देखा है
Avtar Singh Jasser
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