बिन पिए बे-ख़ुद ख़ुदी को कर के देखा है बाज़ुओं में हमनशीं को भर के देखा है
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हम ने दुनिया की तरफ़ देखा नहीं तुम को चाहा और कुछ सोचा नहीं
Aalok Shrivastav
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Vishal Singh Tabish
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उस ने खिड़की से चाँद देखा था मैं ने खिड़की में चाँद देखा है
Zubair Ali Tabish
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बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं है, ये आँखों के लिए अच्छा नहीं है
Rahat Indori
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
Meer Taqi Meer
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ज़रा नज़दीक आ कर सुन मेरी इक बात ऐ उर्दू मेरी तहरीर बिन तेरे मुक़म्मल हो नहीं सकती
Avtar Singh Jasser
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शहर के रस्ते लगे जब सख़्त अपने पाँव को हम दिवाने लौट आए फिर से अपने गाँव को माँ के आँचल का सुकूँ भी याद आया तब हमें याद जब हम ने किया पीपल की ठंडी छाँव को
Avtar Singh Jasser
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पहले पहले जान छिड़कता था उस पे अब मैं उस सेे जान छुड़ाना चाहता हूँ
Avtar Singh Jasser
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तेरी आँखों ने दीवाना कर रखा है मंदिर जैसा दिल मयख़ाना कर रखा है
Avtar Singh Jasser
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मेरे हिस्से में आया इक ऐसा ग़म जिस के आगे लाखों ख़ुशियाँ भी हैं कम
Avtar Singh Jasser
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