शहर के रस्ते लगे जब सख़्त अपने पाँव को हम दिवाने लौट आए फिर से अपने गाँव को माँ के आँचल का सुकूँ भी याद आया तब हमें याद जब हम ने किया पीपल की ठंडी छाँव को
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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ये दुनिया इस लिए ही मुझ को पागल कह रही है मेरी कश्ती जो तूफ़ाँ के मुक़ाबिल बह रही है
Avtar Singh Jasser
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तुझ से दूर हुआ तो ये मालूम हुआ ख़ुद से कितना दूर निकल आया था मैं
Avtar Singh Jasser
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मेरे हिस्से में आया इक ऐसा ग़म जिस के आगे लाखों ख़ुशियाँ भी हैं कम
Avtar Singh Jasser
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मेरी क़िस्मत में बरबादियाँ थीं अज़ल से ही लिक्खी हुईं तुझ से जस्सर करूँँ क्या गिला तू फ़क़त इक बहाना हुआ
Avtar Singh Jasser
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उर्दू ज़बाँ से चाहतों का ये असर हुआ 'जस्सर' सुख़न मेरा हलावतों से तर हुआ
Avtar Singh Jasser
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