डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
More from Vishal Singh Tabish
वैसे वो इक फूल है मुझ को भाता है पर ग़ुस्से में पत्थर का हो जाता है
Vishal Singh Tabish
22 likes
कहानी में तुम्हारे ज़िक्र भर से मेरा किरदार हल्का हो रहा है
Vishal Singh Tabish
22 likes
हम ने सोचा है इस के बारे में, कुछ मुनाफ़ा है इस खसारे में मैं तो ख़्वाबों से तर्क करता था, कुछ न कुछ बात है तुम्हारे में
Vishal Singh Tabish
49 likes
मशवरा हम भी तो दे सकते थे पर तेरा साथ दे रहे थे हम
Vishal Singh Tabish
60 likes
तुम पर इक दिन मरते मरते मर जाना है, दीवाने को कहाँ ख़बर है घर जाना है एक शब्द तुम को अंधेरे का ख़ौफ़ दिला कर, बा'द में ख़ुद भी जान बूझकर डर जाना है
Vishal Singh Tabish
54 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Vishal Singh Tabish.
Similar Moods
More moods that pair well with Vishal Singh Tabish's sher.







