ख़ुशी से कुछ न मिला अब उदास रहने दो मैं थक गया हूँ ग़मों के ही पास रहने दो शराब पी के नशा क्यूँँ ख़राब करना है मुझे उन आँखों का दीदार पास रहने दो
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ज़ख़्म भर जाए भी तो क्या हासिल दाग़ सा इक निशान रहता है
Arbab Shaz
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सोचते हुए मिरी हयात कट गई इल्म जब हुआ तो देखा रात कट गई
Arbab Shaz
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सोच कर जिस को दिल धड़कता है दिल की आवाज़ वो सुनी ही नहीं
Arbab Shaz
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इसी वजह से ही रहता हूँ मैं ज़मीं से जुड़ा मुझे पता है कि अंजाम क्या है गिरने के बा'द
Arbab Shaz
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इश्क़ में 'अरबाब' कोई ज़ोर चलता ही नहीं मुब्तला रह कर भी उन सेे प्यार करते जाइए
Arbab Shaz
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