सोचते हुए मिरी हयात कट गई इल्म जब हुआ तो देखा रात कट गई
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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भेज देता हूँ मगर पहले बता दूँ तुझ को मुझ से मिलता नहीं कोई मिरी तस्वीर के बा'द
Umair Najmi
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हमेशा इक दूसरे के हक़ में दुआ करेंगे ये तय हुआ था मिलें या बिछड़ें मगर तुम्हीं से वफ़ा करेंगे ये तय हुआ था
Shabeena Adeeb
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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ज़ख़्म भर जाए भी तो क्या हासिल दाग़ सा इक निशान रहता है
Arbab Shaz
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सौ अक्स अगर देखने का शौक़ है 'अरबाब' शीशे की तरह आप बिखर क्यूँँ नहीं जाते
Arbab Shaz
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मोहब्बत में मुझे ये लोग रोने भी नहीं देते मेरे आँसू से यारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
Arbab Shaz
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पहले तो ग़ौर से वो सुनी शा'इरी मिरी ता'रीफ़ कर रही है फिर आवाज़ की मिरी
Arbab Shaz
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वहम को क़स्दन हक़ीक़त के बराबर देखना ख़ुश्क सहरा में कभी पानी का मंज़र देखना
Arbab Shaz
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