वहम को क़स्दन हक़ीक़त के बराबर देखना ख़ुश्क सहरा में कभी पानी का मंज़र देखना
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यहाँ तुम देखना रुतबा हमारा हमारी रेत है दरिया हमारा
Kushal Dauneria
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
Tajdeed Qaiser
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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उस की जानिब से भी चाहा है बराबर ख़ुद को मैं ने इक-तरफ़ा मुहब्बत तो कभी की ही नहीं
Idris Babar
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उसी के चेहरे पे आँखें हमारी रह जाएँ किसी को इतना भी क्या देखना ज़रूरी है
Jyoti Azad Khatri
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ज़ख़्म भर जाए भी तो क्या हासिल दाग़ सा इक निशान रहता है
Arbab Shaz
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सोच कर जिस को दिल धड़कता है दिल की आवाज़ वो सुनी ही नहीं
Arbab Shaz
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सब्र का बाँध जो टूटा तो ज़बाँ से निकला इश्क़ का तीर तभी जा के कमाँ से निकला
Arbab Shaz
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लगा के आग यहाँ नफ़रतों की लोग अभी सुकून ढूँढ़ रहे जा के आसमानों में
Arbab Shaz
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सौ अक्स अगर देखने का शौक़ है 'अरबाब' शीशे की तरह आप बिखर क्यूँँ नहीं जाते
Arbab Shaz
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