सब्र का बाँध जो टूटा तो ज़बाँ से निकला इश्क़ का तीर तभी जा के कमाँ से निकला
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मैं बाल बाल बच गया हर बार इश्क़ से सर के बहुत क़रीब से पत्थर गुज़र गए
Umair Najmi
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है
Shakeel Jamali
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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वहम को क़स्दन हक़ीक़त के बराबर देखना ख़ुश्क सहरा में कभी पानी का मंज़र देखना
Arbab Shaz
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मिरी ज़िंदगी तू किधर गई कि तिरा पता नहीं मिल रहा मुझे तेरे साथ ही चलना है कोई रास्ता नहीं मिल रहा
Arbab Shaz
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कुछ ख़्वाहिशें थीं बात थी जो अनकही रही अफ़सोस मुख़्तसर सी मिरी ज़िंदगी रही
Arbab Shaz
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मोहब्बत में मुझे ये लोग रोने भी नहीं देते मेरे आँसू से यारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
Arbab Shaz
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लगा के आग यहाँ नफ़रतों की लोग अभी सुकून ढूँढ़ रहे जा के आसमानों में
Arbab Shaz
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