कुछ ख़्वाहिशें थीं बात थी जो अनकही रही अफ़सोस मुख़्तसर सी मिरी ज़िंदगी रही
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सब्र का बाँध जो टूटा तो ज़बाँ से निकला इश्क़ का तीर तभी जा के कमाँ से निकला
Arbab Shaz
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साथ होते तुम जो मेरे ग़म भी होता बेवजह का साथ मेरे तुम नहीं हो ग़म यही बस तुम नहीं हो
Arbab Shaz
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सोच कर जिस को दिल धड़कता है दिल की आवाज़ वो सुनी ही नहीं
Arbab Shaz
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मुस्कुरा कर कमाल कर बैठे ज़िंदगी से सवाल कर बैठे
Arbab Shaz
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सौ अक्स अगर देखने का शौक़ है 'अरबाब' शीशे की तरह आप बिखर क्यूँँ नहीं जाते
Arbab Shaz
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