किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ग़ैर से खेली है होली यार ने डाले मुझ पर दीदा-ए-ख़ूँ-बार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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वो नहीं भूलता जहाँ जाऊँ हाए मैं क्या करूँँ कहाँ जाऊँ
Imam Bakhsh Nasikh
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अब की होली में रहा बे-कार रंग और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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