किस तरह हम बिखर गए जानाँ सब दुआ बे-असर गए जानाँ मैं तो ख़ुश था मगर ये चारा-गर मुझ को बर्बाद कर गए जानाँ
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो
MIR SHAHRYAAR
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फिर हो रही है रुख़्सत उस की महक यहाँ से ये कमरा ये जहाँ फिर सुनसान होने को है
MIR SHAHRYAAR
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ज़रूरत थी बस बात करने की हम को मगर बात करने की फ़ुर्सत किसे है अब इस बस्ती में सब ख़ुदा बन गए हैं अब इक दूसरे की ज़रूरत किसे है
MIR SHAHRYAAR
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या तो कुछ भी नहीं रहा बाक़ी या सिमट आया बहर-ओ-बर मुझ में मैं कि इक सानिहा हूँ लम्हों का होता क्या क्या है लम्हा-भर मुझ में
MIR SHAHRYAAR
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मैं कब तक तितलियों के साथ झूमूँ बिछड़ मुझ से मुझे हैरान तो कर
MIR SHAHRYAAR
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