गजरा देखो कंगन देखो कैसी सजी है दुल्हन देखो उलझी उलझी खोई खोई कब से बैठी है बिरहन देखो
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क्या तुम तब भी ऐसे ही चुप-चाप तमाशा देखोगे इस मुश्किल में फँसने वाली अगर तुम्हारी बेटी हो
Zia Mazkoor
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देखो देखो जानम हम दिल अपना तेरे लिए लाए सोचो सोचो दुनिया में क्यूँँ आए तेरे लिए आए
Rahat Indori
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फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी
Aziz Nabeel
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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तुम्हारा तो ख़ुदा से राबता है तो देखो ना, हमारे दुख बता कर
Siddharth Saaz
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जी ही जी में कई अहद-ए-वफ़ा करते-करते जी ही जी में वो कई बार मुकरता होगा जाने किस ध्यान में बैठा हुआ होगा वो शख़्स जाने किन रंगों से कमरे को वो भरता होगा
MIR SHAHRYAAR
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फिर हो रही है रुख़्सत उस की महक यहाँ से ये कमरा ये जहाँ फिर सुनसान होने को है
MIR SHAHRYAAR
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मैं कब तक तितलियों के साथ झूमूँ बिछड़ मुझ से मुझे हैरान तो कर
MIR SHAHRYAAR
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कई हफ़्तों से अपने कमरे में अपने साए से लड़ रहा हूँ मैं
MIR SHAHRYAAR
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तू तो फिर भी तू है अपनी ज़ात पर शक है बात ये है अब मुझे हर बात पर शक है
MIR SHAHRYAAR
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