kitab-e-ishq mein har aah ek aayat hai par aansuon ko huruf-e-muqattiat samajh
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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पता था उस से बिछड़ते ही दोस्त घेरेंगे वही हुआ मुझे रंज-ओ-अलम ने घेर लिया
Umair Najmi
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तू उस के दिल में जगह चाहता है यार जो शख़्स किसी को देता नहीं अपने साथ वाली जगह
Umair Najmi
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किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है पर आँसुओं को हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त समझ
Umair Najmi
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मैं किस से पूछूँ ये रस्ता दुरुस्त है कि ग़लत जहाँ से कोई गुज़रता नहीं वहाँ हूँ मैं
Umair Najmi
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यार तस्वीर में तन्हा हूँ मगर लोग मिले कई तस्वीर से पहले कई तस्वीर के बा'द
Umair Najmi
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