कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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सारे का सारा तो मेरा भी नहीं और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं ग़ौर से देखने पे बोली है शादी से पहले सोचना भी नहीं
Kushal Dauneria
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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जहाँ जो था वहीं रहना था उस को मगर ये लोग हिजरत कर रहे हैं
Liaqat Jafri
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मेरी जानिब न बढ़ना अब मोहब्बत मैं अब पहले से मुश्किल रास्ता हूँ
Liaqat Jafri
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मैं दौड़ दौड़ के ख़ुद को पकड़ के लाता हूँ तुम्हारे इश्क़ ने बच्चा बना दिया है मुझे
Liaqat Jafri
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मैं बहुत जल्द लौट आऊँगा तुम मिरा इंतिज़ार मत करना
Liaqat Jafri
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मैं कुछ दिन से अचानक फिर अकेला पड़ गया हूँ नए मौसम में इक वहशत पुरानी काटती है
Liaqat Jafri
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