मेरी जानिब न बढ़ना अब मोहब्बत मैं अब पहले से मुश्किल रास्ता हूँ
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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जहाँ जो था वहीं रहना था उस को मगर ये लोग हिजरत कर रहे हैं
Liaqat Jafri
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कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना
Liaqat Jafri
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मैं बहुत जल्द लौट आऊँगा तुम मिरा इंतिज़ार मत करना
Liaqat Jafri
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इश्क़ तू ने बड़ा नुक़सान किया है मेरा मैं तो उस शख़्स से नफ़रत भी नहीं कर सकता
Liaqat Jafri
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मैं कुछ दिन से अचानक फिर अकेला पड़ गया हूँ नए मौसम में इक वहशत पुरानी काटती है
Liaqat Jafri
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