कोई मौक़ा ज़िंदगी का आख़िरी मौक़ा नहीं इस क़दर ताजील क्यूँ रफ़-ए-कुदूरत के लिए
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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कोई शरीक-ए-ग़म नहीं अब तिरी याद के बग़ैर कोई अनीस-ए-दिल नहीं अब तिरे नाम के सिवा
Hafeez Hoshiarpuri
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कहीं ये तर्क-ए-मोहब्बत की इब्तिदा तो नहीं वो मुझ को याद कभी इस क़दर नहीं आए
Hafeez Hoshiarpuri
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ख़ुद अपनी गुम-शुदगी से जिन्हें शिकायत है तू ही बता उन्हें तेरा निशाँ कहाँ से मिले
Hafeez Hoshiarpuri
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मोहब्बत करने वाले कम न होंगे तिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
Hafeez Hoshiarpuri
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