कुछ आदमी औरत के बालों में लगाते फूल हैं हर आदमी औरत को अपनी पीटता रहता नहीं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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ठीक है मैं दिल लगा लेती किसी से इक दफ़ा फिर क्या मगर इस बार सच्चा इश्क़ होगा उस को मुझ से
Bhoomi Srivastava
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थी मैं अच्छी कल तक तेरे ख़ातिर पर अब जो हूँ वो तेरा कर्मा हूँ
Bhoomi Srivastava
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कभी नहीं क़ुबूल होगी ये दुआ मेरी मगर सितारे टूटते गए मैं उस को माँगती रही
Bhoomi Srivastava
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ये समुंदर ग़ालिबन औरत के अश्कों से बने हैं ये जहाँ सदियों से औरत को रुलाता आ रहा है
Bhoomi Srivastava
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मेरे होंठों पे उस के नाम का हर पल तराना है वो दीवाना समझता है वही केवल दिवाना है उसे मैं, मुझ को वो सारी कमी के साथ है मंज़ूर मुहब्बत के दयारों में यही अपना फ़साना है
Bhoomi Srivastava
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