क्यूँ इस क़दर पागल हुआ जाता है तू उस के लिए सबकी तरह वो शख़्स हड्डी-मांस का ही है,बता
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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ज़िन्दगी आसान है पर लोग हैं मुश्किल बहुत ही
Sarvjeet Singh
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ये शे'र जो मैं लिख रहा हूँ कौन पूछेगा इसे ये शे'र जो तुम पढ़ रही हो हर ज़बाँ पर होगा अब
Sarvjeet Singh
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मरते दम तक उन को मुझ सेे तकलीफ़ रहेगी जब मर जाऊँगा बोलेंगे कितना अच्छा था
Sarvjeet Singh
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सुंदरता अब इस पर निर्भर करती है क्या कौन यहाँ पर कपड़े कितने कम पहनेगा
Sarvjeet Singh
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वैसे मुझ को विश्वास नहीं फिर भी इक झूटी आस समझ लो अब हम दोनों को मिलवा सकता है तो जादू-टोना ख़ाली
Sarvjeet Singh
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