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ये शे'र जो मैं लिख रहा हूँ कौन पूछेगा इसे ये शे'र जो तुम पढ़ रही हो हर ज़बाँ पर होगा अब

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ज़िन्दगी आसान है पर लोग हैं मुश्किल बहुत ही

Sarvjeet Singh

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ज़माना ख़ुद को बदले या न बदले ये उसी पर है कही पर तुम किसी की यूँँ न अपने आप को बदलो

Sarvjeet Singh

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ये जो इतने ख़ुश दिखते हैं सच में ये इतने ख़ुश हैं क्या

Sarvjeet Singh

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वो जो मुझ को कुछ पल अपना लगता है क्यूँ वो कुछ पल बा'द पराया लगता है वो जो मेरे साथ बहुत सालों से है वो अब और किसी का साया लगता है वो बस मुझ सेे हँस के बातें करता है और न जाने सब को क्या-क्या लगता है उस के आगे मेरी क़ीमत ख़ास नहीं उस को जो हो महँगा सस्ता लगता है दिल की बातें दिल में रखना ठीक नहीं कह कर देखो काफ़ी अच्छा लगता है

Sarvjeet Singh

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सुंदरता अब इस पर निर्भर करती है क्या कौन यहाँ पर कपड़े कितने कम पहनेगा

Sarvjeet Singh

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