वो जो मुझ को कुछ पल अपना लगता है क्यूँ वो कुछ पल बा'द पराया लगता है वो जो मेरे साथ बहुत सालों से है वो अब और किसी का साया लगता है वो बस मुझ सेे हँस के बातें करता है और न जाने सब को क्या-क्या लगता है उस के आगे मेरी क़ीमत ख़ास नहीं उस को जो हो महँगा सस्ता लगता है दिल की बातें दिल में रखना ठीक नहीं कह कर देखो काफ़ी अच्छा लगता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये शे'र जो मैं लिख रहा हूँ कौन पूछेगा इसे ये शे'र जो तुम पढ़ रही हो हर ज़बाँ पर होगा अब
Sarvjeet Singh
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मुसलसल बढ़ रहा है फ़ासला अब कि मुझ में और अच्छे आदमी में
Sarvjeet Singh
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मैं कर नहीं पाया ज़रूरी काम सब मैं कुछ नहीं करने में काफ़ी व्यस्त था
Sarvjeet Singh
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ज़िन्दगी आसान है पर लोग हैं मुश्किल बहुत ही
Sarvjeet Singh
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मुझे भी आज ही फ़ुर्सत मिली थी इस ज़माने से तुझे भी आज ही कोई ज़रूरी काम पड़ना था
Sarvjeet Singh
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