Related Sher

रिश्तों की ये नाज़ुक डोरें तोड़ी थोड़ी जाती हैं, अपनी आँखें दुखती हों तो फोड़ी थोड़ी जाती हैं ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं

Subhan Asad

46 likes

हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

Dushyant Kumar

47 likes

मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है

Parveen Shakir

87 likes

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा

Sahir Ludhianvi

84 likes

पास हमारे आ कर वो शर्माती है तब जा कर के एक ग़ज़ल हो पाती है उस को छूना छोटा मोटा खेल नहीं गर्मी क्या सर्दी में लू लग जाती है

Tanoj Dadhich

49 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Abroo Shah Mubarak.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Abroo Shah Mubarak's sher.