लाई न ऐसों-वैसों को ख़ातिर में आज तक ऊँची है किस क़दर तिरी नीची निगाह भी
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई
Firaq Gorakhpuri
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बर्क़-ए-फ़ना भी खाए जहाँ ठोकरें 'फ़िराक़' राह-ए-वफ़ा में आते हैं ऐसे मक़ाम भी
Firaq Gorakhpuri
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हर फ़रेब-ए-ग़म-ए-दुनिया से ख़बरदार तो है तेरा दीवाना किसी काम में हुशियार तो है
Firaq Gorakhpuri
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ये न पूछ कितना जिया हूँ मैं ये न पूछ कैसे जिया हूँ मैं कि अबद की आँख भी लग गई मेरे ग़म की शाम-ए-दराज़ में
Firaq Gorakhpuri
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क्यूँँ इंतिहा-ए-होश को कहते हैं बे-ख़ुदी ख़ुर्शीद ही की आख़िरी मंज़िल तो रात है
Firaq Gorakhpuri
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