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लिखित में हमारी गवाही लगेगी लिखा है 'लहू की सियाही लगेगी' किसी की ग़रज़ हो तो आ कर बचा ले वगरना नदामत तबाही लगेगी

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ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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तू ने दोज़ख़ माँगा था मैं ले आया तुझ को क्या करना उस से जो गिरवी है

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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नशे के हाल में जिस रोज़ मुझ को घर उतारा था जफ़ा-जू ने मिरे दिल से ख़ुदा का डर उतारा था बड़ा मासूम लगता था उसे हम दोस्त कहते थे मिरी तलवार से जिस ने मिरा ही सर उतारा था

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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पूछना हाल दिखे जब भी परेशाँ होते थक गया है तिरा ये शहर फ़रोज़ाँ होते

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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यूँँ तख़्त-गाह से रब का तबादला देखा इसी बिना पे फ़रिश्तों में फ़ासला देखा

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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