ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से
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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
Sahir Ludhianvi
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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सिगरेट की शक्ल में कभी चाय की शक्ल में इक प्यास है कि जिस को पिए जा रहे हैं हम
Ameer Imam
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या नशे में या दुआ में हर ज़बाँ खुलती है आख़िर सिर्फ़ यज़्दाँ और साक़ी राज़ सबके जानते है
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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तू ने दोज़ख़ माँगा था मैं ले आया तुझ को क्या करना उस से जो गिरवी है
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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नज़ील इश्क़ का अंजाम देखते ही तो तिरे मुहिब ने गुलाबों से हाथ खींचे हैं
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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ख़्वाहिश है दिल कि राह पे ख़ामोशियाँ न हों अब चाहिए कि शहर तमाशे किया करें
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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कि अब तो रोज़ सुनते हैं मुहब्बत इश्क़ के चर्चे कई घाइल किए इसने किसी को मार डाला है
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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