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कि अब तो रोज़ सुनते हैं मुहब्बत इश्क़ के चर्चे कई घाइल किए इसने किसी को मार डाला है

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यूँँ तख़्त-गाह से रब का तबादला देखा इसी बिना पे फ़रिश्तों में फ़ासला देखा

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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साज़िशें हज़ार कर तू मौत से लड़ा मुझे ऐ मिरे अज़ीज़ एक मर्तबा हरा मुझे मुस्कुराते दिन के सुख से अब मुझे है क्या ग़रज़ तू उदास शाम की वो सिसकियाँ गिना मुझे

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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पूछना हाल दिखे जब भी परेशाँ होते थक गया है तिरा ये शहर फ़रोज़ाँ होते

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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शहर तो ख़ाली पड़ा है यार अब तू ही बता आज किस का ध्यान खींचूँ बंद कमरों की तरफ़

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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