sherKuch Alfaaz

साज़िशें हज़ार कर तू मौत से लड़ा मुझे ऐ मिरे अज़ीज़ एक मर्तबा हरा मुझे मुस्कुराते दिन के सुख से अब मुझे है क्या ग़रज़ तू उदास शाम की वो सिसकियाँ गिना मुझे

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ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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ये कि मेरा आसमाँ जो आ गया नज़र तुम्हें बारिशें सिखा रही हैं इक नया हुनर तुम्हें

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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तू ने दोज़ख़ माँगा था मैं ले आया तुझ को क्या करना उस से जो गिरवी है

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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नज़ील इश्क़ का अंजाम देखते ही तो तिरे मुहिब ने गुलाबों से हाथ खींचे हैं

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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नशे के हाल में जिस रोज़ मुझ को घर उतारा था जफ़ा-जू ने मिरे दिल से ख़ुदा का डर उतारा था बड़ा मासूम लगता था उसे हम दोस्त कहते थे मिरी तलवार से जिस ने मिरा ही सर उतारा था

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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